रियाद, सऊदी अरब: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार को इस्लामी नए वर्ष 1448 हिजरी का आरंभ होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस बात की पुष्टि संबंधित धार्मिक अधिकारियों और आधिकारिक सूत्रों ने की है। इस्लामी कैलेंडर के आधार पर यह नया साल भारत सहित पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व होता है।
सऊदी अरब के स्थानीय अधिकारियों ने चाँद दिखने की प्रक्रिया के बाद हिजरी साल के बदलाव की घोषणा की, जो इस्लामिक महीनों के आधार पर निर्धारित होता है। इससे पहले दोनों देशों में प्रधानमंत्री एवं धार्मिक मामलों के मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुस्लिम माह के शुरू होने की जानकारी दी। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने भी इसी के साथ अगली बड़ी धार्मिक घटना, आशूरा, 25 जून को मनाए जाने की बात कही।
इस्लामी नया साल मुस्लिम समुदाय के लिए पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के मेक्का से मदीना हिजरत करने की याद दिलाता है। इस अवसर पर विभिन्न मस्जिदों में विशेष प्रार्थनाएँ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हैं। आशूरा, जो नवम और दशम मुहर्रम को मनाया जाता है, इस्लामी इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है, खासकर शिया मुस्लिमों के लिए, क्योंकि यह इमाम हुसेन की शहादत की याद दिलाता है।
सऊदी अरब और UAE में इस्लामिक नए वर्ष और आशूरा की घोषणा के साथ ही मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक कर्तव्यों एवं परंपराओं को याद करते हैं। नई शुरुआत और आत्मनिरीक्षण का यह समय सभी के लिए गहराई से महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिजरी कैलेंडर के अनुसार विश्वासियों को इस्लामी तिथियों की सही जानकारी आवश्यक होती है ताकि वे धार्मिक उत्सवों एवं अवसरों को सही ढंग से मना सकें। सऊदी अरब और UAE की आधिकारिक घोषणा से पूरे मुस्लिम विश्व में एकरूपता भी बनी रहती है, जो धार्मिक एकता को प्रबल करती है।
इस बार का इस्लामी नया साल और आशूरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस्लामी दुनिया में कई बड़े परिवर्तन और आध्यात्मिक जागरूकता देखी जा रही है। स्थानीय सरकारें और धार्मिक संगठन भी इन अवसरों के लिए विशेष प्रबंधों में जुटे हुए हैं ताकि सभी श्रद्धालु सम्मानपूर्वक इन पावन दिनों को मना सकें।
अधिकतर मुस्लिम देश इस्लामी कैलेंडर के अनुसार अपने धार्मिक समारोह आयोजित करते हैं और सऊदी अरब व UAE जैसे प्रमुख इस्लामी देशों की घोषणा का विशेष महत्व होता है। यह घोषणा धार्मिक स्थिरता, सांस्कृतिक धाराओं की पुष्टि और सामाजिक सौहार्द बनाने में सहायक होती है।
Author: UP 24.in
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