डेटा विश्लेषण: बंगाल में भाजपा के प्रचंड जीत में SIR हटाने की भूमिका

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Data analysis: How SIR deletions shaped BJP’s landslide in Bengal

कोलकाता, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस चुनाव में भाजपा को लगभग 70% सीटों पर विजय मिली, जो क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रचंड जीत का एक वजह चुनावी सूची से मतदाताओं के बड़े पैमाने पर हटाए जाने को भी माना जा रहा है, जिसे भारतीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया था।

नवंबर से फरवरी के बीच, बंगाल की विधानसभा चुनावी सूची से नौ मिलियन से अधिक नाम हटाए गए। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग का उद्देश्य फर्जी मतदाताओं और सूची की गलतियों को सुधारना था। हालांकि, इस बड़े पैमाने पर हटाए गए मतदाताओं ने चुनाव के नतीजों पर गहरा प्रभाव डाला। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मतदाता सूची सबसे अधिक संकुचित हुई, वहाँ भाजपा ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी त्रिपक्षीय कांग्रेस की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

विशेष रूप से, इस प्रक्रिया की तुलना बिहार में हुई समान SIR से की गई, जहाँ इस तरह की वोटर लिस्ट में कमी के बावजूद कोई स्पष्ट रूप से सत्ता पक्ष के पक्ष में चुनावी लाभ नहीं देखा गया। इस तथ्य से यह समझा जा सकता है कि बंगाल में SIR वृद्धि का भाजपा के पक्ष में चुनावी वृद्धि से गहरा संबंध है।

पार्टी के चुनावी विश्लेषण और सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि SIR द्वारा मतदाता सूची में हुई कटौती ने बंगाल विधानसभा चुनाव की दिशा को काफी हद तक प्रभावित किया। इसकी वजह से मतदाता आधार में परिवर्तन आया, जिसने भाजपा को वोटों में बढ़त दिलाई और चुनाव परिणामों में उनके पक्ष में भारी बदलाव लाया।

चुनाव आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से था, लेकिन इसके चुनावी प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का राजनीतिक नतीजों पर ऐसा व्यापक प्रभाव इस बात पर भी सवाल उठाता है कि चुनावी प्रक्रियाओं में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि सभी मतदाता अपनी भूमिका निभा सकें।

समाप्त करने से पहले कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल के आगामी राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के तकनीकी और प्रशासनिक कदमों के चलते बदलावों को समझना तथा उनका विश्लेषण करना आवश्यक हो गया है। राज्य की जनता और राजनीतिक दलों दोनों के लिए भविष्य के चुनावों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोपरि होना चाहिए।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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