ढाका, बांग्लादेश
भारत के नए नियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने शुक्रवार को बेंपाल-पेत्रापोल जमीन सीमा पार करते हुए सड़क मार्ग से बांग्लादेश में प्रवेश किया। उनके इस कदम को उनकी कार्यालय द्वारा सुलभता और गर्मजोशी के प्रतीक के तौर पर देखा गया।
हालांकि, कुछ ही घंटों में यह कदम एक कूटनीतिक विवाद का कारण बन गया, जो अभी भी ढाका में गूंज रहा है।
75 वर्षीय दिनेश त्रिवेदी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री हैं। उनका बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में नियुक्ति महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पिछले 55 वर्षों में इस पद पर पहली बार कोई राजनेता हैं। इससे पहले इस पद के लिए हमेशा भारतीय विदेशी सेवा के कैरियर अधिकारी भेजे जाते थे।
त्रिवेदी को अप्रैल महीने में नियुक्त किया गया था, और उन्होंने प्रणय वर्मा का स्थान लिया है, जिन्हें अब भारत का बेल्जियम तथा यूरोपीय संघ में राजदूत बनाया गया है।
सीमा पर बांग्लादेशी पत्रकारों से बात करते हुए त्रिवेदी ने खेल-कूद, स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग के बारे में खुलकर चर्चा की।
लेकिन विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब उनसे सीमा तनाव तथा व्यापार और यात्रा में आसानियों के विषय में सवाल किया गया। उन्होंने कहा, “भारत और बांग्लादेश का आसमान एक है, हवा एक है, दर्द भी एक है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं बांग्लादेश आया हूं। जो भी भारत के 1.4 अरब लोगों और बांग्लादेश के 200 मिलियन लोगों के लिए अच्छा होगा, वह हमारे लिए भी अच्छा होगा।”
इस ‘साझा आसमान’ बयान ने ढाका में राजनीतिक और मीडिया दोनों जगह बहस छेड़ दी। कई बांग्लादेशी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की सकारात्मक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे संवेदनशीलता का अभाव और क्षेत्रीय संप्रभुता पर सवाल उठाने के रूप में देखा।
विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश और भारत की संबंधों में सुधार तथा सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन भाषा और प्रतीकों के प्रति नाजुकता भी व्याप्त है। ऐसे में राजनयिकों को संवेदनशीलता से काम लेना आवश्यक होता है।
यह विवाद उस समय उभरा है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ते सहयोग और समझौतों को लेकर नई पहल की जा रही हैं। यह सवाल भी उठता है कि क्या राजदूत का यह बयान उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण को दर्शाता है या भारत सरकार की नीति का प्रतिबिंब है।
फिलहाल, भारत सरकार ने न तो इस बयान पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है और न ही विवाद को लेकर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वहीं, बांग्लादेश में राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर चर्चा जारी है।
यह घटना दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में एक नया मोड़ साबित हो सकती है या फिर विवाद को और बढ़ावा भी दे सकती है। ऐसे में आगे की कूटनीतिक बातचीत और वार्ता पर निगाहें बनी हुई हैं।
Author: UP 24.in
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