कोलकाता, पश्चिम बंगाल – भारतीय प्रबंधन संस्थान कंकत्ता (IIM-कलकत्ता) ने अपनी प्लेसमेंट नीति में बदलाव करते हुए उन छात्रों को स्थगित प्लेसमेंट की सुविधा देने की घोषणा की है, जो इस समय रोजगार के बजाय उद्यमशीलता में रुचि रखते हैं। यदि छात्र भविष्य में रोजगार की संभावनाएं तलाशना चाहते हैं, तो वे अगले वर्ष संस्थान के प्लेसमेंट प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र होंगे।
यह पहल संस्थान की ओर से युवाओं में उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है, जिससे वे बिना किसी दबाव के अपने स्टार्टअप या व्यवसायिक विचारों को आगे बढ़ा सकें। प्रबंधन संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार, यह सुविधा उन्हीं छात्रों के लिए उपलब्ध रहेगी जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके होंगे लेकिन तत्काल नौकरी स्वीकारने के बजाय अपने व्यवसायिक प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
IIM-कलकत्ता के प्लेसमेंट विभाग के प्रमुख ने बताया कि “यह निर्णय छात्रों को अधिक स्वतंत्रता और विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है ताकि वे अपने करियर की दिशा खुद तय कर सकें। उद्यमशीलता एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है, और हम चाहते हैं कि हमारे छात्र उस दिशा में भी रिस्क लेकर आगे बढ़ें। यदि वे बाद में नौकरी करना चाहें तो प्लेसमेंट प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे।”
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम से न केवल उद्यमी बनना चाहने वाले छात्रों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि संस्थान की लोकप्रिया भी बढ़ेगी। छात्रों को यह विश्वास मिलेगा कि वे अपने करियर को लेकर अलग-अलग विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं बिना यह चिंता किए कि कहीं प्लेसमेंट का मौका हाथ से निकल जाएगा।
पिछले वर्षों में भारत में स्टार्टअप और उद्यमशीलता के क्षेत्र में जबरदस्त विकास हुआ है और अब उच्च शिक्षा संस्थान भी इस दिशा में छात्रों को सहारा देने लगे हैं। IIM-कलकत्ता का यह कदम युवाओं को अपने हुनर को सही दिशा में लगाने में मदद करेगा और संभवत: देश के आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।
संस्थान के छात्र भी इस निर्णय से उत्साहित दिख रहे हैं। एक छात्र ने कहा, “कई बार हम उद्यमशीलता में समय और ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन नौकरी की चिंता रहती है। यह नीति हमें बिना किसी दबाव के अपने सपनों को पूरा करने का मौका देती है।”
इस नई सुविधा के तहत, जो छात्र अपने स्टार्टअप या अन्य उद्यमशीलता प्रयासों को प्राथमिकता देना चाहते हैं, वे बिना किसी बाधा के अगले वर्ष प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। इससे उन्हें दोहरी सुरक्षा मिलेगी – एक तरफ उनका उद्यम बढ़ेगा, और जरूरत पड़ने पर वे नौकरी भी प्राप्त कर सकेंगे।
इस तरह IIM-कलकत्ता ने न केवल उभरते उद्यमियों को उत्साहित किया है, बल्कि प्लेसमेंट प्रक्रिया को भी अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाया है। आने वाले वर्षों में इस नीति के परिणाम देखने योग्य होंगे और संभव है कि अन्य संस्थान भी इस मार्ग का अनुसरण करें।
Author: UP 24.in
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