नई दिल्ली, भारत – केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का दावा है कि केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (CFTIs) में भर्ती प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है, लेकिन हाल ही में प्राप्त RTI डेटा इस दावे के विपरीत एक चिंताजनक वास्तविकता प्रदर्शित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रतिष्ठित संस्थानों में 35.2% शिक्षक पद खाली पड़े हैं, जो देश के उच्च तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के गुणवत्ता और भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
RTI के तहत एक आवेदन के जवाब में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग एक तिहाई शिक्षण पद केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों में खामी बनी हुई है। इन पदों पर रिक्तता से शैक्षणिक गतिविधियों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे छात्रों को आवश्यक शिक्षा और मार्गदर्शन मिलने में बाधा आ सकती है।
हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है कि भर्ती प्रक्रिया निरंतर जारी है और पदों को भरने के लिए अलग-अलग दौर में विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, फिर भी उपलब्ध आंकड़े इस प्रक्रिया की गति और समग्र प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाते हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भर्ती में देरी और उच्च स्तरीय पदों की रिक्तता समय पर निर्णय लेने और शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है।
इस विषय पर एक वरिष्ठ तकनीकी संस्थान के प्राध्यापक ने बताया, “प्रभारी पदों की रिक्तता से संस्थान की शैक्षणिक जिम्मेदारियां प्रभावित होती हैं। इससे न केवल शोध गतिविधि पर असर पड़ता है, बल्कि छात्रों के लिए अनुभवहीन शिक्षकों से शिक्षा मिलने का खतरा भी रहता है।”
विश्लेषकों का मानना है कि उच्चतम तकनीकी संस्थानों में स्थिर और प्रगतिशील मानव संसाधन प्रबंधन के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना होगा कि नियुक्तियां समय पर हो और शिक्षण आधार मजबूत बना रहे। इसके बिना, भारत के तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गिरावट संभव है।
केंद्र सरकार की ओर से लगातार प्रयासों के बावजूद, शैक्षणिक संस्थानों में उपयुक्त शिक्षक वर्ग की उपलब्धता और गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। RTI डेटा ने इस दिशा में चिन्ताजनक संकेत दिए हैं, जो नीति निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं शिक्षा क्षेत्र के हितधारकों के लिए चेतावनी है। भविष्य में बेहतर भर्ती नीति और कार्यान्वयन के लिए ठोस योजनाएं बनाना आवश्यक होगा ताकि देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
Author: UP 24.in
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