खाजा बंदनावाज विश्वविद्यालय में 26 मई को हिन्दू हडल ऑन कैंपस आयोजि्त होगा

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The Hindu Huddle on Campus to be held at Khaja Bandanawaz University on May 26

गुलबर्गा, कर्नाटक । खाजा बंदनावाज विश्वविद्यालय में 26 मई को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम “द एज ऑफ डिस्ट्रैक्शन एंड डूमस्क्रोलिंग: इट्स इम्पैक्ट ऑन स्टूडेंट बिहेवियर एंड मेंटल हेल्थ” विषय पर आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्तमान डिजिटल युग में छात्रों के आचरण और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना है।

डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण विशेषकर युवा वर्ग विभिन्न प्रकार के मानसिक दबाव में आ रहा है क्योंकि वह लगातार सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर डूबा रहता है। इस स्थिति को “डूमस्क्रोलिंग” के नाम से जाना जाता है, जिसमें व्यक्ति निरंतर नकारात्मक समाचारों को स्क्रोल करता रहता है, जो तनाव, चिंता और अवसाद की स्थिति को जन्म देता है।

खाजा बंदनावाज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ और आमंत्रित वक्ता इस विषय पर अपने विचार साझा करेंगे तथा छात्रों को इस डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदमों के बारे में जागरूक करेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और तकनीकी व्यसनों से बचाव के लिए उपाय सुझाना है।

इस कार्यक्रम में अनेक कार्यशालाएं, पैनल चर्चाएं और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ, मानसिक स्वास्थ्य के पेशेवर और छात्र भाग लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को अपने व्यवहार को समझने और नियंत्रित करने में मदद करेंगे, जिससे वे एक स्वस्थ और सक्षम जीवन जी सकेंगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से उनके प्रयास हैं कि वे शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के मानसिक विकास को भी प्रोत्साहित करें। साथ ही, यह पहल युवा पीढ़ी को तकनीक के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने में सहायक सिद्ध होगी।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी छात्र समुदाय से आग्रह किया गया है कि वे इस विषय पर होने वाली चर्चाओं और जानकारियों से लाभान्वित होकर अपने समग्र विकास में योगदान दें। यह आयोजन न केवल एक शैक्षिक अवधी है, बल्कि एक सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासा को भी जागृत करेगा।

अंत में यह कहा जा सकता है कि “द एज ऑफ डिस्ट्रैक्शन एंड डूमस्क्रोलिंग” जैसी चुनौतियों का सामना करने में इस तरह के मंच अतिआवश्यक हैं, जो नई पीढ़ी को सजग और सतर्क बनाने में मदद कर सकें।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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