सुप्रीम कोर्ट ने 2027 की जनगणना से जाति गणना हटाने की याचिका खारिज की

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SC dismisses petition to exclude caste enumeration from Census 2027

नई दिल्ली, भारत

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2027 की जनगणना से जाति गणना को बाहर रखने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय से स्पष्ट हो गया कि जाति आधारित आंकड़े जुटाने का अधिकार सरकार के पास है और न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बगची तथा न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि किसी भी सरकार को यह जानना आवश्यक होता है कि कितने लोग पिछड़े वर्गों से हैं और किन्हें कल्याण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “यह एक नीति का मामला है।”

याचिकाकर्ता का तर्क था कि जाति के इतने बड़े पैमाने पर डेटा इकट्ठा करने का कोई उचित औचित्य नहीं है और इससे राजनीतिक एवं कॉर्पोरेट हितों द्वारा जाति डेटा के दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए सरकार के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार किया।

आगामी जनगणना 2027 दो चरणों में होगी – पहला चरण अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक गृह-सूचीकरण का रहेगा तथा दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का। इससे पहले आखिरी दसवें वर्ष की जनगणना 2011 में हुई थी। 2020 में भौतिक डेटा एकत्र करने का पहला चरण शुरू होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण यह स्थगित कर दिया गया।

भारत में जाति आधार पर पूरी जनसंख्या को गिनने का आखिरी प्रयास 1931 में हुआ था। तब से जाति आधारित आंकड़ों को लेकर कई बार बहस होती रही है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की इस सलाह से यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार जाति गणना को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जाति आधारित आंकड़ों के बिना पिछड़े वर्गों के कल्याण तथा सामाजिक नीतियों का निर्माण करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वहीं, आलोचक इस चिंता को भी व्यक्त करते हैं कि जाति आंकड़ों के गलत इस्तेमाल से सामाजिक ध्रुवीकरण और विभाजन बढ़ सकता है।

सरकार ने कहा है कि जनगणना के दौरान जुटाए गए सभी आंकड़ों का उपयोग सामाजिक-आर्थिक नीति निर्धारण के लिए किया जाएगा और वे सुरक्षित रखे जाएंगे। इस बीच, देशभर के सभी वर्गों के लिए एक सटीक और न्यायसंगत आंकड़ों की आवश्यकता बनी रहेगी ताकि विकास के लिए उपयुक्त योजनाएं बनाई जा सकें।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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