शहर निकोबार, राज्य अण्डमान व निकोबार द्वीप समूह – निकोबार के आदिवासी समुदायों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित तीन वन्यजीव अभयारण्य बनाने की योजना का कड़ा विरोध व्यक्त किया है। स्थानीय जनजातीय परिषद ने कहा है कि लिटिल निकोबार, मिरो और मेन्चल द्वीपों के निवासियों से इस योजना को लेकर कोई परामर्श नहीं किया गया।
जनजातीय परिषद के अनुसार, सरकार द्वारा इस क्षेत्र में वन्यजीव अभयारण्यों के निर्माण को लेकर किसी भी तरह की स्थानीय भागीदारी या संवाद नहीं हुआ। यह पहल आदिवासी जीवनशैली और उनके मूल निवास स्थानों पर गहरा असर डाल सकती है। परिषद ने केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने और व्यापक संवाद प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
निकोबार द्वीप समूह में रहने वाले आदिवासी समुदायों की मुख्य आजीविका कृषि, मछली पकड़ना और पारंपरिक कारीगरी पर आधारित है। तीनों द्वीपों पर प्रस्तावित अभयारण्य इनके रहने की जमीन से जुड़े हैं, इसलिए उनका विरोध स्वाभाविक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि सरकार ने ये प्रोजेक्ट जैव विविधता संरक्षण के उद्देश्य से प्रस्तावित किया था। हालांकि, स्थानीय समुदायों की अनदेखी और उनकी राय न लिए जाने के कारण इस योजना को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जनजातीय नेताओं का कहना है कि अभयारण्य के नाम पर उनकी भूमि अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना सही है, लेकिन इसे बिना उन्हें साथ लिए आगे बढ़ाना न्याय संगत नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे स्थानीय लोगों की ज़रूरतों और दशाओं को समझें और भविष्य में इस तरह की योजनाओं में उनकी भागीदारी अनिवार्य करें।
इस विवाद के बाद केंद्र सरकार ने फिलहाल अभयारण्यों के निर्माण पर रोक लगा दी है और एक समिति गठित की है जो इस मामले की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आदिवासी समाज भी अपनी आवाज़ उठाते हुए न्याय पाने के लिए आंदोलन करने को तैयार है।
स्थानीय प्रशासन और जनजातीय संगठनों के बीच संवाद की पहल की जा रही है ताकि दोनों पक्षों के मतों को समझा जा सके और एक समाधान निकाला जा सके जो वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय जनजीवन दोनों के हित में हो।
Author: UP 24.in
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