बर्थाकायस्थ (पठेड) के पंचायत घर में आंगनवाड़ी विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने की अनूठी पहल देखने को मिली। कार्यक्रम में लगाए गए विभिन्न स्टॉल बच्चों और अभिभावकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे, जहां रंगों की पहचान, गिनती, कहानी सुनाना, चित्र पहचान और मानसिक विकास से जुड़ी गतिविधियाँ कराई गईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों को शुरुआती शिक्षा से जोड़ना और आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण तक सीमित न रखकर उन्हें “पहली पाठशाला” के रूप में विकसित करना रहा। बच्चों ने खेल, चित्रों और शिक्षण सामग्री के माध्यम से उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे पंचायत घर का माहौल शैक्षिक मेले में बदल गया।
मेला कॉर्डिनेटर संगीता आंगनबाड़ी, पूनम आंगनबाड़ी, बिंदु आंगनबाड़ी और ऋतु आंगनबाड़ी ने बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित किया। वहीं सहायिका ममता, मंजू और सविता ने कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद रहे। शिवकुमार अग्रवाल, नाथीराम कश्यप, अनिल कुमार, नैना, आरजू, शबनम, शहजादी, रजिया, शहनाज और नौरीन सहित कई अभिभावकों ने बच्चों की गतिविधियों को देखा और इस पहल की सराहना की। अभिभावकों का कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ती है और उनका मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में “पोषण भी पढ़ाई भी” अभियान के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में खेल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती उम्र में ही रचनात्मक और व्यवहारिक शिक्षा से जोड़ना है। आधारित गतिविधियों से सीखाने पर विशेष जोर दिया गया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांव स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहे तो बच्चों की शुरुआती शिक्षा मजबूत होगी और सरकारी स्कूलों में आगे की पढ़ाई के लिए उनकी नींव बेहतर तैयार हो सकेगी।
Author: UP 24.in
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