कनाडा की आयु आधारित आव्रजन प्रणाली को खत्म किया जाना चाहिए, सरकार ने बदलावों का प्रस्ताव रखा

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Canada’s age-based immigration points must be scrapped as government proposes changes

टोरंटो, ओंटारियो

कनाडा की आव्रजन प्रणाली में आयु आधारित पॉइंट सिस्टम पर विवाद गर्माता जा रहा है। देश की वर्तमान व्यापक रैंकिंग प्रणाली (CRS) में आव्रेदकों को स्थायी निवास प्राप्त करने के लिए विभिन्न मानदंडों पर अंक दिए जाते हैं, जिनमें आयु, शिक्षा, भाषा कौशल, कनाडाई कार्य अनुभव और पारिवारिक संबंध शामिल हैं। यह प्वाइंट सिस्टम 1967 में स्थापित किया गया था ताकि पूर्वाग्रह और नस्लीय भेदभाव को दूर किया जा सके।

हाल ही में, संघीय सरकार ने इस प्रणाली में बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिसमें कुछ वर्गों के प्वाइंट्स को खत्म करने की योजना शामिल है। हालांकि, परिवार से जुड़े प्वाइंट्स को हटाने का सुझाव दिया गया है, आयु आधारित अंक प्रणाली को बरकरार रखा गया है।

इस विषय पर मेरी रिसर्च बताती है कि क्यूं कनाडा को आयु आधारित आव्रजन प्वाइंट सिस्टम खत्म कर देना चाहिए। कनाडाई अधिकार और स्वतंत्रता चार्टर की धारा 15(1) में स्पष्ट रूप से आयु भेदभाव का निषेध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सिंह बनाम रोजगार एवं आव्रजन मंत्री के फैसले के अनुसार, यह चार्टर कनाडा में उपस्थित सभी व्यक्तियों पर लागू होता है, जिनमें नागरिक ना होने वाले भी शामिल हैं।

कई आवेदक स्थायी निवास के लिए कनाडा के भीतर से आवेदन करते हैं। सरकार ने 2026-27 के लिए एक विशेष योजना भी शुरू की है, जिसमें देश में मौजूद कुशल मजदूरों को तेजी से स्थायी निवास प्रदान किया जाएगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां मांग अधिक है।

मेरे द्वारा बातचीत किए गए वकीलों के अनुसार, ऐसे आवेदकों के पास कानूनी आधार होगा कि वे इस प्वाइंट सिस्टम को चार्टर उल्लंघन बताते हुए चुनौती दें। उनका दावा होगा कि आयु आधारित प्वाइंट प्रणाली कनाडाई कानून के तहत आयु भेदभाव करती है।

आयु आधारित आव्रजन नीतियाँ, जो आव्रेदकों के अवसरों को सीमित करती हैं, एक ऐसा पक्ष हैं जिस पर पुनर्विचार जरूरी है ताकि सभी योग्य आवेदकों को समान अवसर मिले। इससे न केवल कानूनी विवादों से बचा जा सकता है, बल्कि एक समावेशी और न्यायसंगत आव्रजन नीति भी विकसित होगी।

निष्कर्षतः, कनाडा को एक आधुनिक और निष्पक्ष आव्रजन व्यवस्था स्थापित करने के लिए आयु आधारित प्वाइंट सिस्टम को समाप्त करना चाहिए। यह कदम केवल कानूनी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक दृष्टि से भी जरूरी है ताकि सभी आवेदकों को उनकी क्षमता और योग्यता के आधार पर सम्मान मिल सके।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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