सैन फ्रांसिस्को, कैलिफॉर्निया – क्वांटम कंप्यूटर जो तकनीकी क्रांति के अगुआ बनने की उम्मीदें लेकर आए हैं, वे पहले से ही नाजुक होते जा रहे हैं। एक नई शोध से पता चला है कि इन कंप्यूटरों में एक ऐसा सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का ‘घोस्ट’ है जो क्वांटम कंप्यूटिंग की क्षमता को सीमित कर रहा है।
क्वांटम कंप्यूटरों की दुनिया में यह अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इन मशीनों की त्रुटि-सहिष्णुता बेहद कम होती है। शोध के अनुसार, रेडिएशन ग्लिच के कारण क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) प्रभावित होते हैं, जिससे इनके प्रदर्शन और भरोसेमंदता पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है।
गूगल के प्रमुख शोधकर्ता इस बात की पुष्टि करते हैं कि क्वांटम कंप्यूटरों को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए इस रेडिएशन ग्लिच को समझना और उससे निपटना आवश्यक है। इस घोस्ट समस्या की वजह से क्वांटम कंप्यूटरों का कार्यकाल सीमित हो जाता है और वे अपेक्षित परिणाम देने में असहाय हो जाते हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती है त्रुटि और अशुद्धताओं को कम करना। वैज्ञानिकों ने लंबे समय से प्रयास किए हैं ताकि क्यूबिट्स को स्थिर रखा जा सके और कम त्रुटि दर के साथ संचालन संभव हो। अब इस शोध ने रेडिएशन से जुड़ी एक नई बाधा सामने रखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्लिच के कारण क्वांटम कंप्यूटिंग की क्षमता पर एक बड़ी सीमा लगाई गई है, जिसे दूर करने के लिए नई तकनीकों और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होगी। इस शोध से यह भी स्पष्ट होता है कि क्वांटम कंप्यूटरों के विकास में अभी और भी कई वैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
यह शोध विश्व भर के क्वांटम कंप्यूटर डेवलपर्स के लिए चेतावनी का संदेश लेकर आया है। अगर इस रेडिएशन प्रभाव को नियंत्रण नहीं किया गया तो क्वांटम कंप्यूटिंग की खूबियां बाधित हो सकती हैं और इसका वादा अधूरा रह सकता है।
इस विषय पर गूगल टीम के वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस समस्या को दूर करने के लिए नए प्रोटोकॉल और तकनीकी सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि क्वांटम कंप्यूटर सच्चे अर्थों में अपने उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।
आगे आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और भी गहन अध्ययन और तकनीकी नवाचार की उम्मीद की जा रही है, जिससे क्वांटम कंप्यूटरिंग न केवल अधिक स्थिर हो बल्कि उसकी विश्वसनीयता भी सुनिश्चित की जा सके।
Author: UP 24.in
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