जम्मू-कश्मीर, भारत – ऑपरेशन सिंदूर के पहले सालगिरह के अवसर पर, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई है कि सीमा-पार निवासियों को उपेक्षा के घेरे से निकालकर राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में लाया जाएगा।
राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन ने पिछले एक वर्ष में सीमा क्षेत्रों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचागत सुधारों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, तथा रोजगार के अवसरों के सृजन पर जोर दिया।
“हमारा उद्देश्य है कि सीमा के इलाके अब भारत की मुख्यधारा के विकास में पीछे न रहें और देश की तरक्की में बराबर भागीदार बनें,” मनोज सिन्हा ने कहा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत, सीमा इलाके के लोगों की जरूरतों को समझते हुए योजनाएं बनाई गई हैं और उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है।
राज्यपाल ने बताया कि सरकारी योजनाओं के अलावा, प्रशासन ने स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, ताकि वे स्थायी रोजगार पा सकें। इसके साथ ही, राज्य में सूक्ष्म व्यापार और कृषि के क्षेत्र में समर्थन प्रदान करने के लिए विशेष सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
इस अवसर पर, विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लेने के बाद मनोज सिन्हा ने कहा कि सीमा क्षेत्र की जनता के साथ संवाद जारी रहेगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास होंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार की प्राथमिकता सीमा क्षेत्र के लोगों का सामाजिक और आर्थिक उत्थान होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सीमा क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास न केवल इन इलाकों का विकास करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगा। स्थानीय निवासियों का देश के विकास में हिस्सा बढ़ाना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
राज्यपाल ने अंत में कहा, “देश की उन्नति तभी संभव है जब सभी क्षेत्रों की जनता समान रूप से प्रगति करे। ऑपरेशन सिंदूर इसी दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।”
यह पहल जम्मू-कश्मीर के विकास की एक नई दिशा देने के साथ ही सामाजिक समरसता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
Author: UP 24.in
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