CIC ने DoPT को UPSC परिणामों में उप-जाति डेटा शामिल करने की सिफारिश की, जिससे सकारात्मक कार्रवाई की पहुंच बढ़ेगी

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CIC recommends DoPT include sub-caste data in UPSC results to broaden reach of affirmative action

नई दिल्ली, भारत – सूचना आयोग (CIC) ने गृह प्रशासन और सार्वजनिक मामलों के विभाग (DoPT) को यूपीएससी परीक्षा के परिणामों में उप-जाति डेटा शामिल करने की सिफारिश की है, जिससे आरक्षित वर्गों के लिए सकारात्मक कार्रवाई की पहुंच में सुधार हो सके।

DoPT के एक अधिकारी ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा 2017 से ही विभाग ने अपनी वेबसाइट पर उम्मीदवारों की सेवा आवंटन सूची के साथ-साथ उनकी श्रेणी का डेटा उपलब्ध कराया है। इसका उद्देश्य परिणामों की पारदर्शिता बढ़ाना और दलित, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग समेत सभी वर्गों के उम्मीदवारों को सही जानकारी प्रदान करना है।

यह कदम तब आया है जब सूचना आयोग ने सरकारी विभागों को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। CIC के अध्यक्ष ने कहा कि उप-जाति संबंधित डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने से न केवल अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को उचित पहचान मिलेगी, बल्कि नीति निर्धारकों को भी लक्षित योजनाओं और आरक्षण की प्रभावशीलता समझने में मदद मिलेगी।

ज्ञात हो कि अब तक केवल सामान्य जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसी व्यापक श्रेणी में डेटा उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन उप-जाति की जानकारी नहीं दी जाती थी। जिससे कई बार विशिष्ट उप-जाति समूहों के प्रतिनिधित्व और उनके लिए आरक्षण की स्थिति का सही आंकलन संभव नहीं हो पाता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि उप-जाति के आंकड़े अगर यूपीएससी परिणामों में शामिल किए जाते हैं तो यह प्रशासनिक स्तर पर आरक्षण नीति के सुधार और वर्ग विशेष के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाना संभव होगा और विभिन्न उप-जाति समूहों के बीच समानता स्थापित करने में मदद मिलेगी।

इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही है कि DoPT शीघ्र ही UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर उप-जाति का डाटा अपडेट करेगा, जिससे अभ्यर्थी और जनता दोनों इसके फायदों का अनुभव कर सकें। यह पहल सरकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता के साथ-साथ सामाजिक समावेशिता की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।

अंततः, सूचना आयोग की यह सिफारिश भारत में सकारात्मक कार्रवाई की प्रभावशीलता बढ़ाने और सामाजिक इक्विटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है। सरकार, विभाग और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इस विषय पर आगामी निर्णय इस दिशा में अधिक स्पष्टता प्रदान करेंगे।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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