चेन्नई, तमिलनाडु: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने IIT मद्रास टेक्नोलॉजी समिट 2026 में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में लाना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी के विकास में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, जिससे समाज को सीधे लाभ मिल सके।
प्रधान ने कहा कि सिर्फ नई तकनीक विकसित करना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में लाकर आम जनता की जिंदगी में बदलाव लाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए शोधकर्ताओं, उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने बताया कि भारतीय प्रतिभा विदेशों में तकनीक विकसित कर रही है, जिसे अब घरेलू उद्योग विदेशी बाजारों से खरीद रहे हैं। यह संकेत है कि भारत केवल तकनीकी नवाचार का केंद्र ही नहीं बल्कि उसका व्यावसायीकरण भी तेजी से कर रहा है।
प्रधान ने कहा, “जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव के लिए हो और उससे समाज को वास्तविक फायदा पहुंचे, तभी हम सचमें विकास की राह पर चलेंगे।” उन्होंने युवाओं को भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी में करियर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ाने को कहा।
इस टेक्नोलॉजी समिट में देश के कई जाने-माने वैज्ञानिक, इंजीनियर और उद्योगपती मौजूद थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के भारत आत्मनिर्भरता के विजन को साकार करने का संकल्प लिया। समिट में विभिन्न नवाचारों और स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी भी हुई, जो देश के तकनीकी भविष्य को उज्जवल बनाने का काम कर रहे हैं।
प्रधान के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए देश की प्रतियोगिता क्षमता बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसी दृष्टिकोण से नई नीतियां बनाई जाएंगी ताकि और अधिक तकनीकी प्रतिभाएं देश में उत्पन्न हों और उनका विकास स्थायी रूप से हो।
समापन में प्रधान ने सभी से आग्रह किया कि वे विज्ञान और तकनीकी विकास को जिंदगी का हिस्सा बनाएं और तकनीक को सामाजिक कल्याण के लिए उपयोग करें। इससे न केवल आर्थिक विकास होगा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में भी सुधार आएगा।
Author: UP 24.in
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