ओडिशा में ‘प्रणालीगत खोइयां’ ने आदिवासी व्यक्ति को बहन के कंकाल बैंक ले जाने पर मजबूर किया: जांच में खुलासा

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‘Systemic failures’ made tribal man take his sister’s skeletal remains to bank, finds probe in Odisha

Bhubaneswar, Odisha

राज्य सरकार की जांच में पता चला है कि ओडिशा के एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी बहन की डेथ सर्टिफिकेट में देरी और सरकारी प्रणालीगत खामियों के कारण उसकी बहन के कंकाल को बैंक ले जाना पड़ा। राज्य सरकार के राजस्व विभाग की ओर से जांच कर रहे राजस्व मंडलायुक्त ने बताया कि मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में अतिशय विलंब हुआ।

यह मामला हाल ही में सामने आया, जब स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में यह पता चला कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी और प्रक्रियात्मक देरी के कारण मृतकों के परिवार को सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए यह और भी बड़ी समस्या बन गई।

जांच के अनुसार, परिवार ने जब बैंक में बहन के नाम पर मिल रही पेंशन या अन्य लाभ के लिए आवेदन किया, तो अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग की। लेकिन यह प्रमाणपत्र समय पर उपलब्ध नहीं हो पाया। इस बीच, परिवार की हताशा इतनी बढ़ गई कि उन्होंने बहन के कंकाल को ही बैंक ले जाने का निर्णय लिया, ताकि उनकी बात सुनी जाए और सहायता प्राप्त हो सके।

राजस्व मंडलायुक्त ने कहा, “मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में हुई देरी पूरी तरह अस्वीकार्य है। संबंधित विभागों को तत्काल सुधार करना होगा ताकि ऐसी घटनाएं पुनः न हों।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए सरकार विशेष कदम उठा रही है और ऐसी प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए व्यापक योजना बनायी जाएगी।

इस पूरे मामले ने राज्य प्रशासन के सिस्टम में आवश्यक सुधार की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अपने प्रशासनिक ढांचे और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं समयबद्धता लानी होगी, जिससे नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं आसानी से और सही समय पर मिल सकें।

आदिवासी अधिकार संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं आदिवासी समुदाय के प्रति समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता और उपेक्षा को दर्शाती हैं।

स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर ध्यान देने के लिए ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया है, जिसमें प्रशासन से न्याय सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख है।

इस जांच का निष्कर्ष राज्य सरकार को सौंपा जा चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार प्रभावी सुधार के साथ इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेगी।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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