उम्दुर्मन, सूडान – डॉ. जमाल एल्टाएब ने अल नाओ अस्पताल का नेतृत्व करते हुए सूडान में हालिया संघर्षों के बीच स्वास्थ्य सेवा को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खार्तूम की राजधानी के पास स्थित इस अस्पताल में स्थिति तब जटिल हो गई जब शहरी क्षेत्र पर सूडान की सेना और अर्धसैनिक लड़ाकों के बीच नियंत्रण बार-बार बदलता रहा।
डॉ. जमाल ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अस्पताल की सेवाएं निरंतर चालू रखने के लिए अथक प्रयास किए। जब युद्ध के कारण अस्पताल की आपूर्ति बंद हो गई, तो उन्होंने स्थानीय समुदाय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संपर्क कर किट और दवाओं की व्यवस्था की। अस्पताल में गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज प्राथमिकता पर था, और डॉ. जमाल एवं उनकी टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिदिन दर्जनों ऑपरेशन किए।
उम्दुर्मन की स्थिति पहले से ही संवेदनशील थी, लेकिन जब संघर्ष गहराया, तो अस्पताल के स्टाफ के भीतर भय और तनाव फैल गया। फिर भी डॉ. जमाल ने सदैव टीम को हिम्मत दी और युद्ध के बीच मरीजों को बेहतर इलाज प्रदान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल केवल चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि एक आश्रय स्थल बन गया जहां लोग अपना डर भूलकर जीवन की उम्मीद जिंदा रखते थे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अल नाओ अस्पताल जैसे संस्थान विशेषकर युद्ध के दौरान देश के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का आधार होते हैं। डॉ. जमाल का योगदान इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक प्रतिबद्ध व्यक्ति मुश्किल हालात में भी मानवता की सेवा कर सकता है।
स्थानीय निवासियों ने डॉ. जमाल की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की सेवाओं के चलते कई परिवारों ने अपने घायलों का इलाज पा सका। ‘‘डॉ. जमाल ने हमारे लिए संघर्ष के बीच आशा की किरण बनकर काम किया,’’ एक स्थानीय नागरिक ने कहा।
सूचना मिल रही है कि सूडान में शांति प्रयास जारी हैं, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अभी भी क्षेत्र में शिथिलता के कारण जटिल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। डॉ. जमाल और उनकी टीम की कहानी सूडान के चिकित्सा क्षेत्र की स्थिरता और सहनशीलता की मिसाल बनी हुई है।
Author: UP 24.in
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