टेली-मानस हेल्पलाइन पर बढ़ती कॉलर संख्या: मानसिक स्वास्थ्य में एआई की कमी के कारण लोग मानव सहायता की ओर लौटे

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Tele-MANAS helpline sees rise in callers turning to humans after AI falls short on mental health

नई दिल्ली, भारत – मानसिक स्वास्थ्य सहायता के क्षेत्र में टेली-मानस हेल्पलाइन को हाल के दिनों में कॉल करने वालों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है, खासकर उन लोगों की जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सेवाओं से संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब मानसिक स्वास्थ्य का मामला हो तो मनुष्यों से संवाद की अहमियत और विश्वसनीयता अधिक होती है, जो एआई आधारित तकनीकें पूरी तरह से प्रदान नहीं कर पातीं।

टेली-मानस हेल्पलाइन, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों और संकट की स्थितियों से गुजर रहे लोगों को सहायता प्रदान करती है, ने पिछले छह महीनों में कॉलरों के बीच मानवीय काउंसलर से बात करने की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीक से उत्पन्न समाधान पूर्ण नहीं हैं और जरूरतें मनुष्यों द्वारा ही बेहतर समझी और संभाली जा सकती हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स में लगभग 40% वृद्धि हुई है, जिसमें ज्यादातर लोग अपनी चिंताएं, अवसाद, तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में गहन एवं व्यक्तिगत बातचीत की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भावनात्मक समर्थन और सहानुभूति प्रदान करने में मानव संवाद की भूमिका अपूरणीय है।

टेली-मानस के प्रमुख अधिकारी डॉ. अजय शर्मा ने कहा, “हमने देखा है कि जब लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट्स या प्रणाली से संबंधित सलाह लेते हैं, तो कई बार वे अपनी वास्तविक भावनात्मक ज़रूरतों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए वे ultimately मानव काउंसलर से जुड़ने का चयन करते हैं।”

इस बदलाव के पीछे तकनीकी सीमाएं भी जिम्मेदार हैं। एआई प्रणालियाँ अभी भी मनुष्य की समझदारी, संवेदना और जटिल विचारों को समझने में कमजोर हैं, जबकि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामलों में यही गुण अत्यंत आवश्यक हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की है कि एआई आधारित सेवाएं उनकी समस्या का ठीक से समाधान नहीं कर पातीं तथा कभी-कभी गैरइंसानी प्रतिक्रियाएं देती हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस ट्रेंड को देखते हुए टेली-मानस हेल्पलाइन में विशेषज्ञ मानव काउंसलर की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही, मंत्रालय मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय स्पर्श को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानसिक स्वास्थ्य चिंतकों के लिए यह स्थिति एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाती है कि तकनीकी प्रगति के साथ भी, मानव संवाद और समझ की आवश्यकता कम नहीं हुई है। वे इसके लिए ऑनलाइन वर्कशॉप, काउंसलिंग सत्र और जागरूकता अभियानों को और मजबूत कर रहे हैं ताकि समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जा सके।

इसलिए, विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि व्यक्ति जब भी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का सामना करें, तो तकनीक के अलावा मानव सहायता को अपनाएं ताकि उन्हें पूर्ण और प्रभावशाली समाधान मिल सके।टेली-मानस हेल्पलाइन के बढ़ते उपयोग से यह स्पष्ट होता है कि भावनात्मक जुड़ाव और सहानुभूति को बटोरने का सबसे कारगर तरीका अभी भी मनुष्य ही है।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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