बहुत प्रगति हुई, गेंद अब ईरान के पाले में: वांस

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Made lot of progress, ball in Iran’s court: Vance

इस्लामाबाद, पाकिस्तान – संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चले शांति वार्ता के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया। पिछले सप्ताहांत में हुई इस लंबी बैठक में वॉशिंगटन ने जोर देते हुए कहा कि तेहरान ने अपने परमाणु ईंधन समृद्धि के अधिकार से पीछे हटने से इंकार कर दिया है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाना था, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर अहम मुद्दे पर मतभेद बरकरार रहे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को देश की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है और इसे समाप्त करने से साफ इनकार किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह वार्ता दोनों पक्षों के लिए निराशाजनक रही, क्योंकि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी साफ दिखाई दी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को खतरा न हो, लेकिन तेहरान की कड़ा रुख के कारण असमंजस बढ़ गया है।

पिछले कुछ वर्षों में ईरान और अमेरिका के बीच संबंध कई बार तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद। इस बीच, क्षेत्रीय देशों और वैश्विक समुदाय ने भी इस संकट को लेकर चिंता जाहिर की है कि अगर वार्ता सफल नहीं होती तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वार्ता की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष कितनी लचीलापन दिखाते हैं और क्या वे एक-दूसरे की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं। वर्तमान दौर में ईरान की परमाणु समृद्धि को लेकर अमेरिका का सख्त रुख इस वार्ता को जटिल बनाता नज़र आ रहा है।

तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, आगे की कार्रवाई के लिए अमेरिका ने ईरान पर दबाव जारी रखने की रणनीति अपनाई है, जबकि ईरान अपने परमाणु अधिकारों पर अड़े रहने का संकेत दे रहा है। इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी अहम बनी हुई है, जो दोनों देशों को बातचीत के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अंततः, इस वार्ता का निर्णय ईरान के हाथ में है, क्योंकि वॉशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गेंद ईरान के पाले में है। अगर ईरान अपनी स्थिति में बदलाव करता है तो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं, अन्यथा संघर्ष की संभावना बनी रहेगी।

UP 24.in
Author: UP 24.in

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