गुवाहाटी, असम। असम में भाजपा की जूनियर सहयोगी असम जनता पार्टी (AGP) ने आगामी चुनाव में पिछले दौरे जितने ही सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर इसके राजनीतिक प्रभाव में निरंतर गिरावट दिखाई दे रही है। पिछले दशक से सत्ता में बने रहने के बावजूद AGP की लोकप्रियता और मतदान हिस्सेदारी में कमी एक बड़ी चिंता बन चुकी है।
AGP का गठन असम आंदोलन के नतीजे के रूप में हुआ था और यह पार्टी क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता देती आई है। हालांकि, भाजपा के साथ गठबंधन ने पार्टी को कई मौकों पर राजनीतिक स्थिरता और सत्ता तक पहुंच प्रदान की, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी पैठ कमजोर होती दिख रही है। खासकर 2016 के बाद से जो सीटें AGP रखती आई है, उनके वोट शेयर में आंशिक गिरावट दर्ज की गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, BJP के समर्थन के बावजूद AGP को स्थानीय स्तर पर कुछ खास मुद्दों पर किसानों और युवा वर्ग का समर्थन खोता नजर आ रहा है। विपक्षी दलों द्वारा भी AGP पर केंद्र सरकार की नीतियों के कारण स्थानीय जनों की नाराजगी का आरोप लगाया जाता है। यह पार्टी की चुनाव अभियान रणनीतियों में कमी और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक कमजोरी को भी दर्शाता है।
पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि आगामी चुनाव की चुनौतियां पिछले वक्त से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने संदेश को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा और युवा मतदाताओं को जोड़ने पर खास ध्यान देना होगा। बिना इस सुधार के सीटों पर स्थिरता बनाए रखना कठिन होगा।
हालांकि, AGP के नेतृत्व में स्थानीय विकास परियोजनाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। इसके चलते कुछ इलाकों में उनकी पकड़ बनी हुई है, परंतु व्यापक स्तर पर पार्टी के लिए अपने वोट बैंक को मजबूत करना आवश्यक हो गया है। आगामी चुनाव परिणाम यह स्पष्ट कर देंगे कि क्या पार्टी इस गिरावट से उबर पाती है या नहीं।
विपक्षी दल भी इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए सक्रिय हैं। कुछ दल पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं, जो AGP के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा करती है। संक्षेप में, AGP के लिए आने वाले चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Author: UP 24.in
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