सदौली क़दीम: टोडरपुर शाकुंभरी शुगर मिल पर किसानों का विरोध तेज़, भुगतान में देरी पर प्रशासन और मिल प्रबंधन पर सवाल

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सदौली क़दीम स्थित टोडरपुर शाकुंभरी शुगर मिल में गन्ना भुगतान लम्बे समय से लंबित होने के खिलाफ शनिवार को किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। मिल परिसर के बाहर सैंकड़ों ट्रैक्टर पहुंचे और किसानों ने कानून के तहत समयबद्ध भुगतान न होने पर आपत्ति जताई।

कृषि उपज अधिनियम के तहत मिलों पर समय सीमा में भुगतान करना अनिवार्य है। किसानों का कहना है कि मिल द्वारा भुगतान में लगातार देरी करना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

इस दौरान कुछ किसान नेताओं ने SDM मनवेंद्र सिंह से बातचीत का हवाला देते हुए प्रस्तावित कलेक्ट्रेट मार्च रोक दिया। SDM ने आश्वासन दिया कि 31 दिसंबर से पहले भुगतान कराने के लिए प्रशासन कानूनी दायरे में उपलब्ध सभी विकल्पों का उपयोग कर रहा है।

किसान की शिकायत: भुगतान रुका, बेटी का एडमिशन खतरे में

जोधे बांस निवासी किसान सर्वेश कंबोज ने आरोप लगाया कि भुगतान में देरी का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ा है।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की फीस जमा करने की अंतिम तिथि 7 दिसंबर है और भुगतान अटका होने के कारण वह फीस जमा नहीं कर पा रहे।

किसान का आरोप है कि भुगतान लंबित रखना किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुँचाता है, जो कि कानून के उद्देश्य के विपरीत है।

ट्रैक्टर के कागज़ात माँगने पर आपत्ति

किसानों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान दस्तावेज़ मांगना नियमों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

प्रशासन का पक्ष कानूनी दायरे में दबाव

SDM मनवेंद्र सिंह ने कहा कि DM मिल मालिकों पर कानून के दायरे में अधिकतम दबाव डाल रहे हैं, ताकि भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।

SDM का कहना था कि यदि इन प्रयासों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आता, तो DM किसानों और मिल प्रबंधन की संयुक्त बैठक करेंगे और आगे की कार्रवाई विधिक प्रावधानों के अनुसार तय होगी।

  • किसानों की चेतावनी — भुगतान न हुआ तो विरोध जारी रहेगा

किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि भुगतान निर्धारित समय सीमा में नहीं होता, तो वे अपनी शांतिपूर्ण धरना कार्रवाई जारी रखेंगे।किसानों का कहना है कि भुगतान में देरी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

कुछ किसानों का आरोप—रोहित राणा ने बिना विश्वास लिए समझौता किया

रैली में मौजूद कई किसानों ने आरोप लगाया कि रोहित राणा ने किसानों की सामूहिक सहमति लिए बिना प्रशासन से समझौता कर लिया। किसानों का कहना था कि इतने गंभीर मुद्दे पर किसी भी प्रकार का निर्णय सभी किसानों के विश्वास और सहमति के बाद ही होना चाहिए था।

कुछ किसानों ने यह भी कहा कि ऐसे एकतरफ़ा फैसले आंदोलन की एकता पर सवाल खड़े करते हैं और भुगतान के मुद्दे को कमजोर बनाते हैं।
UP 24.in
Author: UP 24.in

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